तकनीक
ए एम आई टी वाई विश्वविद्यालय में थर्ड नैनो टेक्नालाजी पर सेमिनार का आयोजन
आज लखनऊ के ए एम आई टी वाई विश्वविद्यालय में थर्ड नैनो टेक्नालाजी पर सेमिनार का आयोजन किया गया जिसमे नेनो रिसर्च के बारे में लोगो ने अपने अपने अनुभव को लोगो को बताया और माना की यह टेक्नोलाजी आज समाज के हर फिल्ड में देखने को मिल रही है इस टेक्नोलाजी से उम्मीद जतायी जा रही है की इन्सान का जीवन और सरल हो जायेगा बुढ़ापा ख़त्म हो जायेगा इन्सान की जिन्दगी और लम्बी हो जाएगी यह जानकारी ए एम आई टी वाई विश्वविध्यालय लखनऊ के निदेशक एस ए इजाब्दी ने दी उन्होंने कहा यह नैनो टेक्नोलाजी सबसे पहले हिंदुस्तान में ही सुरु हुई थी जिसका असर आज समाज में हर फिल्ड में देखा जा रहा है उन्होंने कहा की इस नैनो टेक्नोलाजी को फ्यूचर ऑफ़ टेक्नोलाजी भी कहा जा सक्ता है इस सेमिनार में देश भर से आई टी के विशेषज्ञयो ने भाग लिया इस कार्यक्रम से ए एम आई टी वाई विश्वविध्यालय के बच्चो में भी काफी उत्साह देखने को मिला
बहुत ही जल्द हवा से दौड़ेगी गाड़िया
अब बहुत ही जल्द लखनऊ की सडको पर हवा से दौड़ेगी गाड़िया जिसका आविस्कर कर लिया गया है इस प्रयोग में सबसे पहले दो पहिया बाहनो को लाया जायेगा जिसे बाद इसका प्रयोग चार पहिया बाहनो में करने की तैयारी है जिससे ग्लोबल वार्मिंग की समस्या से भी निपटा जा सकेगा और खासबात यह है की इसका खर्च भी बहुत ही कम होगा इसके प्रयोग में पता चला है की 5 रूपये के हवा से ये 40 किलोमीटर तक का सफ़र तय कर सकेगा इतना ही नहीं हवा से चलने पर इसकी स्पीड में भी कोई खास असर नहीं पड़ेगा इससे गाड़ी को 70 से 80 की स्पीड से आराम से चलाया जा सकेगा लखनऊ और कानपुर के दो बैज्ञानिको ने मिल कर एक एयर इंजन का आविस्कर किया है जिससे दो पहिया बाहन में लगाया जा सकता है इस आविस्कर के पीछे बढ़ रही ग्लोबल वार्मिग की समस्या है बैज्ञानिको ने माना की ग्लोबल बर्मिग की समस्या दिन प्रतिदिन बढ़ रही है इसका मुख्य कारण इधन है जो बहनों में स्तेमाल होता है बैज्ञानिक मानते है की इस इंजन के लग जाने से इधन की बचत होगी जससे ग्लोबल बार्मिंग की समस्या से भी बचा जा सकता है उ प्र राजकीय निर्माण निगम में प्रबंधक निदेशक के पद पर कार्यरत रहे वी आर सिंह ( B R Singh )की इस इंजन को बनाने में मुख्य भूमिका रही अपनी सेवा निब्रिती के बाद ये एस एम एस इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलाजी लखनऊ में एसोसियेट डाइरेक्टर के पद पर कार्यरत है इसके साथ साथ इन्होने इस तरह के इंजन का आविष्कार किया इसे बनाने की सोच उन्होंने अपने सेवा कल से ही सुरु कर दिया था लेकिन उसे अब जाकर तैयार कर पाए है इन्होने खुद माना की देश में प्रदूषण का मुख्य कारण ये बाहन है जिसमे दुपहिया बाहन सबसे अभी है इस आविस्कर शोध को अगर लगाया जाता है तो 50 प्रतिसत प्रदूषण पर रोक लग सकती है और इससे आज की सबसे बड़ी समस्या ग्लोबल वार्मिंग पर रोक लगाया जा सकता है क्योकि बाहनो की संख्या दिन प्रतिदिन बढती जा रही है और इससे प्रदूषण जो पैदा हो रहा है उससे तरह तरह की विमारिया भी उत्पन्न हो रही है .इस आविस्कर का मुख्य उद्देश्य बाहनो के इंजन को रिप्लेस कर इस इंजन को लगाने का है जिसका खर्च भी बहुत कम आएगा साथ ही इसमें प्रयोग होने बाला हवा भी आसानी से उपलब्ध हो सकेगा हर कोई इसका प्रयोग कर सकेगा इसमें आम तौर पर गाडियों के ट्यूब में पड़ने वाले हवा का इस्तेमाल होता है जिससे हर कोई इस्तेमाल सकता है इस इंजन को लगवाने से महगाई पर भी काबू पाया जा सकता है क्योकि इस इंजन में पड़ने बाली ५ रूपये की हवा से लगभग ४० किलोमीटर तक का सफ़र कर सकते है साथ ही इसके रफ़्तार पर भी कोई खास असर नहीं पड़ेगा इस इंजन में और सुधार किया जा रहा है जिससे हवा से चार पहिया बाहन भी चलाया जा सके इस इंजन को और भी हैबी करने की तैयारी है साथ ही इस इंजन की इस्तेमाल वाली गाड़ी से दुर्घटना होने पर भी से कोई दूस परिणाम नहीं होने बाला है इस शोध को विश्व के पटल पर रखा जाना है साथ ही इसे विश्व के अने देशो ने भी इसे सराहा है अब देखना यह है की इसका इस्तेमाल कितना संभव होगा और इसे लोग कितना अपनापाते है
अमेरिका मे इलेक्ट्रिक कार
अमेरिका मे वोल्ट नाम के इलेक्ट्रिक कार का आगाज हुआ। इसकी खासियत यह है कि इससे किसी तरह से इंधन की खपत नहीं होगी। इसकी कीमत 41 हजार डॉलर है। कंपनी को उम्मीद है कि इसे मार्केट में बेहतरीन रिसपांस मिलेगा और लोग इसे काफी पसंद करेंगे। एक बार चार्ज करन के बाद यह कार 40 मील तक का सफर कर सकेगी अब देखना यह होगा की लीगो को कितनी पसंद आती है ।
सस्ता टचस्क्रीन फोन
मोबाइल फोन के शौकीनों के लिए अच्छी खबर है। इंडियन मार्केट में जल्द ही ऐसे टचस्क्रीन टीवी और मोबाइल फोन उपलब्ध हो सकते हैं, जो ना केवल काफी सस्ते होंगे बल्कि काफी टिकाऊ और मजबूत भी होंगे। दक्षिण कोरिया और जापान के रिसर्चरों ने एक नई टेक्निक डेवलप की है, जिसके तहत ग्रेफेन फिल्म के माध्यम से टचस्क्रीन बनाई जा सकती है। डिस्कवरी न्यूज की खबर के अनुसार इस तकनीक से बनी टचस्क्रीन का व्यापक उत्पादन किया जाए तो इसकी कीमत काफी कम हो सकती है। फिलहाल जो टचस्क्रीन बनाई जाती है, उसका उत्पादन शुल्क काफी अधिक होता है। यह टचस्क्रीन इंडियम टिन ओक्साइड यानी आईटीओ से बनती है। यह ऐसे पदार्थों से बनता है जो काफी कम उपलब्ध है और इसलिए यह महंगा भी है। इलैक्ट्रोनिक सामान बनाने वाली कम्पनिया अरसे से इसका विकल्प तलाश रही है और एक विकल्प कार्बन नैनोट्यूब्स भी है। परंतु उसके साथ दिक्कत यह है कि वह जल्दी खराब हो जाता है। दूसरी तरफ आईटीओ से बने टचस्क्रीन खराब नहीं होती, टूटती नहीं और आम टचस्क्रीन की तरह पारदर्शी भी होती है। इसकी सबसे बडी विशेषता तो यही है कि यह काफी सस्ती भी है। तो भविष्य में यदि इसी टेक्निक के माध्यम से बनी टचस्क्रीन वाले मोबाइल फोन बाजार में उपलब्ध हो जाएं तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए।
140 साल बढ़ जाएगी उम्र
बर्फ में हजारों साल से दबा एक बैक्टीरिया इंसान की उम्र 140 साल तक बढ़ाने में मदद कर सकता है। इसने चूहों, मक्खियों की उम्र बढ़ा दी है, अब इंसान की बारी है। रूसी वैज्ञानिक इस बैक्टीरिया को दवा के तौर पर इंसानों पर आजमाने की सोच रहे हैं। बेसिलस एफ नाम का यह बैक्टीरिया रूस के उत्तरी याकुशिया प्रांत के मेमोंतोवा में मिला है। दुनिया के इस सबसे ठंडे इलाके में यह बर्फ में दबा हुआ था। वैज्ञानिकों का दावा है इस बैक्टीरिया से बनी दवा का एक इंजेक्शन इंसान की उम्र को 140 साल तक बढ़ा सकता है। शोधकर्ता टीम के प्रमुख अनातोलिया ब्रुशकोवा के अनुसार, जब चूहे और मक्खियां इसके असर से अपनी उम्र बढ़ा सकते हैं, तो फिर यह इंसान पर असरकारक क्यों नहीं होगा?’ प्रयोगशाला में जिन चूहों को इस बैक्टीरिया से बना इंजेक्शन लगाया गया, उनकी औसत उम्र 906 दिन हो गई, जबकि इस चुनिंदा किस्म के चूहे औसतन 589 दिन तक ही जिंदा रहते हैं। ब्रुशकोवा ने बताया कि मक्खियों को बैक्टीरिया मिश्रित भोजन दिया गया, जिससे उनकी तंदुरुस्ती बढ़ गई। उन्होंने कहा कि अब शोधकर्ताओं का अगला कदम यह तय करना है कि बैक्टीरिया को दवा के रूप में तैयार कर उसका इंसानों पर क्लीनिकल ट्रायल कैसे शुरू किया जाए।
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